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Breaking News: सहारनपुर में चर्च की ज़मीन पर भू-माफियाओं का कब्ज़ा, शासनादेश और हाईकोर्ट आदेश की खुली अवहेलना

चर्च ऑफ इंडिया (CIPBC) और Indian Church Trustees ने गंभीर आरोप लगाया है कि मोहम्मद नईम पुत्र हाजी अल्ला रखा नामक व्यक्ति ने दबंगई के बल पर चर्च की ज़मीन पर कब्ज़ा

🚨 Breaking News: सहारनपुर में चर्च की ज़मीन पर भू-माफियाओं का कब्ज़ा, शासनादेश और हाईकोर्ट आदेश की खुली अवहेलना 🚨

सहारनपुर। जनपद सहारनपुर में बाजोरिया मार्ग स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाला सेंट थॉमस चर्च कंपाउंड इस समय भू-माफियाओं के अवैध कब्ज़े की चपेट में है। चर्च ऑफ इंडिया (CIPBC) और Indian Church Trustees ने गंभीर आरोप लगाया है कि मोहम्मद नईम पुत्र हाजी अल्ला रखा नामक व्यक्ति ने दबंगई के बल पर चर्च की ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है और वहां वर्कशॉप लगाकर कब्ज़े को पक्का करने की कोशिश कर रहा है। यह मामला न केवल एक धार्मिक संस्था की संपत्ति पर खुलेआम अतिक्रमण का है बल्कि माननीय हाईकोर्ट और राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों की भी सीधी अवहेलना है।

इस पूरे विवाद की जड़ में न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही प्रमुख रूप से सामने आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ ने पहले ही अपने आदेश दिनांक 07 अप्रैल 2000 (आदेश संख्या 1523 (MB)/2000, चर्च ऑफ इंडिया बनाम अरुण कुमार डीन एवं राज्य सरकार) में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यूपी सरकार और ज़िला प्रशासन चर्च, कब्रिस्तान और अन्य धार्मिक स्थलों की भूमि को तत्काल प्रभाव से भू-माफियाओं और दबंगों के कब्ज़े से मुक्त कराए। हाईकोर्ट का यह आदेश राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी था, जिसके अनुपालन में सरकार ने समय-समय पर शासनादेश भी जारी किए। शासनादेश संख्या 1197/1-2-2000-10-(4)/97 दिनांक 05.06.2000, शासनादेश संख्या 3420/11-2000-500 दिनांक 10.08.2000, शासनादेश संख्या 10-109(1)/9-2000 दिनांक 12.10.2000 और शासनादेश संख्या 52/4-2010-471/2009 दिनांक 04.03.2010 में साफ निर्देश दिए गए थे कि चर्च और कब्रिस्तान की भूमि को अवैध कब्ज़ों से मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन हकीकत यह है कि सहारनपुर में चर्च की भूमि पर खुलेआम कब्ज़ा हो रहा है और अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, जब इस मामले की शिकायत स्थानीय अधिकारियों से की गई तो लेखपाल अरविंद कुमार और कानूनगो निरंजन सिंह की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई। बताया जा रहा है कि लेखपाल ने बिना किसी प्रमाण और दस्तावेज़ के यह दावा कर दिया कि कब्ज़ेदार के पास ज़मीन से संबंधित कागज़ात मौजूद हैं। जबकि मौके पर शिकायतकर्ता द्वारा सभी दस्तावेज़ दिखाए गए और यहां तक कि हाईकोर्ट का आदेश भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन लेखपाल ने जांच करने से इनकार कर दिया। कानूनगो ने तो सीधे-सीधे शिकायतकर्ता से फोन पर कहा कि मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है और जब तक कोर्ट से कोई आदेश नहीं आता, तब तक प्रशासन कुछ नहीं कर सकता। इस रवैये ने भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद कर दिए।

यही नहीं, लेखपाल ने यह भी कहा कि खसरा संख्या 166 नक्शे में कहीं और दर्शाया गया है, जबकि मौके पर सारा रिकॉर्ड मौजूद था और सहारनपुर विकास प्राधिकरण ने पहले ही इस कॉलोनी का नक्शा अप्रूव किया था। अप्रूव नक्शे के मुताबिक, जिस भूमि पर आज वर्कशॉप चल रही है, वहां पार्क दर्शाया गया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने न तो शासनादेशों का पालन किया और न ही हाईकोर्ट आदेश का सम्मान किया। इसने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर क्यों अधिकारी भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं और क्यों हाईकोर्ट के आदेशों को कूड़े के ढेर में डाला जा रहा है।

चर्च प्रबंधन का आरोप है कि पहले भी इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर को आवेदन देकर प्राथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पुलिस की इस चुप्पी ने भू-माफियाओं को खुली छूट दे दी है और आज वे न केवल कब्ज़ा कर रहे हैं बल्कि वर्कशॉप लगाकर चर्च की ऐतिहासिक भूमि को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। स्थानीय लोग इसे न केवल कानून और व्यवस्था की विफलता मान रहे हैं बल्कि एक धार्मिक धरोहर पर खुला हमला बता रहे हैं।

कानूनी दृष्टिकोण से भी यह प्रकरण बेहद गंभीर है। भारतीय दंड संहिता (BNS, 2023) की धारा 357 (आपराधिक अतिक्रमण), धारा 359 (आपराधिक बल और धमकी), धारा 326(2) (धार्मिक स्थलों को क्षति पहुँचाना), धारा 356 (अनधिकार प्रवेश) और धारा 463 (न्यायालयीन आदेश की अवमानना) इस प्रकरण पर सीधे लागू होती हैं। इसके अतिरिक्त Contempt of Court Act, 1971 और Indian Church Act, 1927 के प्रावधानों का उल्लंघन भी साफ दिखाई दे रहा है।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से सवाल किए हैं कि आखिर क्यों सरकार और प्रशासन हाईकोर्ट और शासनादेशों की धज्जियां उड़ाने वाले भू-माफियाओं पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। चर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल संपत्ति का मामला नहीं है बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का मुद्दा है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कब्ज़ा नहीं हटवाया तो यह नज़ीर बन जाएगा और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी भू-माफिया कब्ज़े की हिम्मत करेंगे।

स्थिति यह है कि चर्च प्रबंधन अब सीधे माननीय उच्च न्यायालय और शासन तक अपनी गुहार पहुँचाने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन निष्पक्ष होकर कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक भू-माफियाओं के हौसले और बढ़ते रहेंगे। यह पूरा मामला कहीं न कहीं भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि क्या शासन और प्रशासन इस धार्मिक धरोहर की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी कागज़ों और फाइलों में दबा रह जाएगा।


👉 रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक — समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़

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